हज़रतगंज की शाम 

हां ,हैलो…. कहां हो तुम ~मीरा

हां बस आ गया ..~ अक्षत 

अरे बाबा हो कहां ,कितना टाइम लगेगा ~मीरा

अरे आ रहा हूँ बाबा , Nature’s call समझा करो ~अक्षत

Ok fine….में यहीं कैफे के left corner में हूँ ~मीरा 

U know …तुम्हारी Entry हमेशा गलत समय पर होती है~ अक्षत 

हां , तो अब क्या मुहूर्त देखकर आऊँ ~मीरा

ह्म्म्म…जनाब आप आ गए यही बहुत है ~अक्षत 

कहने को ये उनकी  दूसरी मुलाकात थी ,पर फिर भी सब Casual  ही था उनके बीच , दरअसल यही अंदाज़ था उनका एक दूसरे को समझने का ।

हैलो… कहां हो दिखायी नही दे रही ~ अक्षत

यहीं Back side Entry  से लेफ्ट कोर्नर में देखो ~मीरा

पर वहां तो कोई दीदी जी हैं ~अक्षत 

हां तो fine उन्हीं के पास जाके बैठ जाओ , मैं जा रही ~मीरा

अरसे इंतजार के बाद मिली हैं आप , आपको यूँ ही कैसे जाने दे ~अक्षत ने पास आकर बैठते हुए बोला….

कुछ ऑर्डर कर लेते हैं ~ मीरा ने आदतन पुछा

अच्छा जी …मेहमान नवाज़ी सही है , बिल्कुल 

~अक्षत 

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