‘ गुनाहों का देवता ‘


~
सचमुच शहर , ज़िंदगी से ज्यादे मुक़म्मल होता है चन्दर – सुधा

हाँ सुधा , क्योंकि हमारी ज़िंदगी मे शहर सिर्फ़

इक हिस्सा हो सकता है पर शहर की ज़िन्दगी में तो ऐसी कई मुक़म्मल ज़िंदगियां शामिल रहती हैं -चन्दर

बस मुक़म्मल ज़िंदगियां चन्दर ..???~ सुधा

#yqbaba#yqdidi#गुनाहों का देवता #

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4 विचार “    ‘ गुनाहों का देवता ‘&rdquo पर;

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