शहर ..कुछ आपका, कुछ हमारा ।


अच्छा जब लिख ही दिए हो तो सुनाई डालो ,
काहे ख़ातिर पेट में रख कर हाज़मा बिगाड़ोगे~ मिश्र जी

गुरु मिशिर तुम भी उच्च कोटी वाले …विद्वान हो ,अब इतना कह रहे हो तो सुनाई डालत हैं~ करीम मियां

‘ शहर ‘ ~ सुबह देखो तो दूसरों में जागता दिखे ये ,

शाम होते ही खुद में ढलता दिखे ये ।

न कोई जात , न कोई मज़हब फिर भी

अपनी पहचान से दिखे ये अपना ‘शहर ‘

अभी आगे भी है गुरु ……..!

#yqbaba#yqdidi#शहर#

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