हज़रतगंज की शाम …!

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वो तो भला हो सड़क पे आते जाते राहगीरों का औऱ उन ठेलों का… जो सड़क के दूसरी तरफ , चाय वाले भैया के पास बैठे अक्षत को ज़िन्दगी को करीब से देखने का मौका दे रहे थे ।

का भइया हिआँ कउनो स्पेशल कॉफी हॉउस नहीं है का ~अक्षत ने नवाबी ठाट में चाय वाले भैया से पूछा

अगर हज़रतगंज में न होईन्हों त भइया कहीं न होईन्हों ~ चाय वाले ने जवाब भी उसी नवाबी ठाट में दिया

लगता है आप हियाँ नये आये हो ~ चाय वाले भइया
हाँ कुछ ऐसा ही समझ लो ~ अक्षत ने नरमी बरतते हुए हामी भरी

और फ़िर सड़क पर आते -जाते राहगीरों पर नज़र गड़ाने में मशगूल हो गया ।

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