शहर… कुछ आपका , कुछ हमारा 


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जुगनू बाबू के बारे में परिचय देना आप सब को इस लिहाज से जरूरी है कि मिशिर, करीम चाचा ,और जुगनू बाबू सब साथै पढ़े रहेन , जुगनू बाबू उनमें पोस्ट ऑफिस में क्लर्क बन आज कस्बे में ‘ सरकारी आदमी ‘ कहलावत हैं ।

मिसिर गुरु के पिता जी ज़मींदार थे , उनका लगा हम काहे के कौनो सारें का गुलामी करी ,चूंकि मिशिर गुरु के पास एक विद्या उनके दादा से मिली रही जिनमे उ उस्ताद है (मिशिर गुरु बांसुरी बड़ी अच्छी बजा लेवत है औऱ बना भी , शास्त्रीय संगीत का भी थोड़ा समझ राखत है ) इस लिहाज़ से क़स्बे में शादी हो या हरि-कीर्तन मिशिर गुरु की डिमांड बनी राहत है ।

वहीं करीम चाचा
चाचा पढ़ने में उस्ताद पर , पिता जी की असामयिक मृत्यु ने , उन्हें कस्बे के हेडमास्टर तक ही सीमित रखा , पर करीम चाचा थोड़े सूझ बूझ रखत हैं , ए ख़ातिर उनका आस पास के क़स्बे की हर पंचायत में उनकी पूछ बनी रहत है ।

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