शहर ….कुछ आपका , कुछ हमारा 


~
का नगीना तु आज दोपहर के बखत खेतों में नहीं दिखी
~ माई ( कल्लू मियां की माता श्री )

हाँ अम्मा आज थोड़ा सुशीला के हियां रहें न , सुनत रहेन की सुबह के बखत ही पुलुसु (पुलिस) आई रही न ,तो सोचेंन चल के हाल चाल लिहा जाए ~ नगीना

काहे का रे का बात भई ~ माई

अरे बात का रही माई , ए समाज मे जब मेहरारू(औरत) मर्द बने लागत है त परेशानी त उठावै के पड़ी ~ नगीना

काहे का रे , ऐसे काहे बोल रही उ त विधवा है बेचारी । उसे कउनो को का समस्या ~ माई

यही तो समस्या है अम्मा , पास के गांव के सतेंद्र बाबू उसे मिलने आये रहेन , और अपने साथ चलने की ज़िद कर बैठें ,पर उ ठहरी पक्की पतिव्रता उ मना कई दिहस
और बस उ जाइके पुलुसु में रपट लिखाई आएं की , विधवा होने के बाद भी , इ चरित्रहीन है गांव के माहौल बिगाड़ रही ~ नगीना

Note ~
आगे का हिस्सा ऊपर के वॉलपेपर में मौज़ूद है |

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