शहर …..कुछ आपका , कुछ हमारा 


~
चाचा लागत है , कलजुग आई गवा है , पहले तो शहर मां ई सब सुनत रहेन । ~कल्लू मियां ने चाचा को बैठाते हुए बड़ी गंभीरता से अपनी बात कही

ससुर कलजुग तो तबै आई गवा रहा जब , सीता को ए अपनी प्रजा की खातिर अग्नि परीक्षा देनी पड़ी , तू ससुर आज जागै हो
अच्छा बात त बताओ हमका का होइ गवा ~
करीम चाचा ने कल्लू मियां के बात का मर्म समझाते हुए बोला

सुने नाहीं का आप , सुशील के ख़िलाफ़ सतेंदर बाबू मुदकमा ठोक आएन ~ कल्लू मियां ने आश्चर्य से पूरी दास्तां बयां की

हम्ममम्म , अब पानी मे रहकर मगर से बैर करीहें सुशीला बिटिया त का होइ , एहि खातिर कहा जात हो औरत जात बड़ी दिल के
कमज़ोर होत है ~ करीम चाचा

सही किहेस उ , ई बाऊ साहब ( छत्रिय जाती के संबोधन हेतु ) सारे मनबढ़ होइ गवा रहेन ,बताओ भला लाज न आई उकरे दहलीज़ पे पैर राखत बखत , ससुर अपना तो गएन ओ सती का भी मरजाद ले डूबेंन ~

मिशिर गुरु ने आते ही आते सतेंदर बाबू पे तंज़ कसना सुरु किया , उनका सुशीला से ज्यादे सतेंदर बाबू में इंटरेस्ट रहा ।

काहे खातिर , मिशिर का बाऊ साहब लोगन से छत्तीस का आकड़ा रहा , पिछली बार जब गांव के एक फैसले में बाऊ साहब लोगन ने मिशिर के बिरादर रहे बचाऊ गुरु को बड़ी फटकार लगाई तबै से मिशिर लोगन का छत्तीस का आंकड़ा होइ गवा ।

सती का भी धरम , ईमान होत हौ का मिशिर~
कल्लू मियां ने तंज़ भरे लहजे में पूछा

औरत के पास सिर्फ़ उकरी ममता होत है ,बाकी सब उसकी देह , इज़्ज़त और पहचान मरद की जागीर होत है ~ माई ने बाहर निकलते हुए कल्लू मियां की तरफ देखते हुए बोला

सब एक पल को ख़ामोश , किसी को माई के ऐसे कटु वचन का भान न रहा , तभी मिशिर गुरु ने खामोशी तोड़ते हुए पल्लगी ( नमस्कार) की ।

नहीं माई अइसन काहे कहत हो , औरत तो दुर्गा का रुप होत है ~ मिशिर गुरु ने माई के उम्र का लिहाज़ करते हुए माहौल को नरम बनाने की कोशिश की

रामजियावन बचवा , ए समाज उ दुर्गा को का कभी अपनावत है बताओ । औऱ जब राजा राम का प्रजा सीता को न अपना पाई तो ए त कलजुग है और हमार गांव के लोग~
इस बार माई ने बेहद संजीदा सवाल किया था मिशिर से

माई , ई त उनकी महानता रही न कि एक धोबी के आरोप के भी उ अपने प्रजा का आवाज़ समझने , और राजतंत्र में राजा त प्रजा के प्रहरी होला न माई ~ करीम चाचा

इहे त अंतर बा करीम ए समाज के सोच में की राजा राम क त्याग दिख जाला , पर सीता के त्याग के ए समाज हमेशा कटघरे में खड़ा करत है ~माई ने इस बार उनकी समझ को झकझोर दिया था

#yqbaba#yqdidi#yqbhaijaan#yqtale# मर्यादा , औरत , सीता #

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