Saloni ~ यादें 


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ऑटो की स्पीड जैसे जैसे तेज़ हो रही थी , उनके बीच की दूरियां वैसे वैसे सिमटती जा रही थी , और इन सब के बीच अक्षत की चिंता उस फ़ासले को लेकर थी जो अब आहिस्ता आहिस्ता कम हो रही थी । पहली दफ़े उसको अपने पड़ाव पर पहुचने की जल्दी नहीं थी ,बल्कि वो तो बस ये कोशिश कर रहा था कि ये रास्ता और भी लंबा हो जाये ,और बस एक मुसाफ़िर की तरह वो इस सफ़र में चलता रहे ।

भैया वो यशवंत प्लेस से से चलोगे क्या लीला होते हुए ~अक्षत

हां , वही एक रास्ता है नही आगे बड़ा लंबा पड़ जायेगा ~ऑटो वाले भैया

हां …..क्यूँ आगे कोई काम है क्या , रास्ता तो यही सही है ~सलोनी ने पूछा

नहीं वो इनको अंदर ही अंदर कॉलेज वाली साइड से ले चलना होगा न ,उधर से आते तो u टर्न के बगल से ही तुम्हारे हॉस्टल साइड हो लेते ~अक्षत

चलो कोई नही किधर से भी चले ~ सलोनी

ऑटो के अंदर आती तेज़ हवाओं से उसकी ज़ुल्फ़ें बार बार उसके चेहरे को ढक ले रही थी ,और वो उन बेतरतीब बालों को वैसे ही समेट कर क्लचर में फंसा देती , वैसे ही जैसे अक्षत के वो ख़याल उसके जहन में फंसे हुए थे ,की वो कहना चाह रहा हो कि ये जो ज़ुल्फों की बेपरवाही है इसे यूँ रहने दो , ये तुम्हारे होने के कश्मकश को बयां कर रहे हैं ।

हवा से दिक्कत हो रही हो तो , अंदर आ जाओ , मैं किनारे हो लेता हूँ ~अक्षत

नहीं , अच्छा लग रहा है कभी कभी तो ऐसी हवा मिलती है दिल्ली में ~ सलोनी

ह्म्म्म……वैसे तुम कुछ कहने वाली थी शायद ~अक्षत ने पूछा

हां …तुमको भी तो कुछ बताना था ~ सलोनी

हां पर लेडीज़ फर्स्ट ~अक्षत

कुछ ख़ास नहीं था बस यही की… कभी कोई बात रहे तो कह दिया करो , कोई झिझक मत रखना -सलोनी ने ऑटो से बाहर देखते हुए बड़ी बेपरवाही से कही

हम्म्म्म….ठीक है , वैसे झिझक तो नहीं होती पर थोड़ा careful तो होना पड़ता है ना , अच्छा नहीं लगता कोई कॉलेज में आगे चलकर बात का बतंगड़ बनाये ~ अक्षत

क्या फ़र्क पड़ता है , अब हम ये सोच के थोड़े ही बात करेंगें की कोई क्या सोचता है – सलोनी

बिल्कुल सही ,पर सलोनी जब हम वैसे होते नही और लोग बातें करने लगे तो थोड़ा अजीब लगता है ,हमें थोड़ा कंज़र्वेटिव कह सकती हो – अक्षत

हम्म्म्म….खैर अच्छा अब तुम बताओ क्या कहना था तुम्हें – सलोनी ने बात काटते हुए बोला

कुछ खास नहीं , बस यही की हम जिस तरह तुमसे मिलते है बात करतें हैं अजीब तो नही लगता न तुम्हें ,I mean कभी कभी मुझे लगता है कुछ ज्यादे हक़ जता देता हूँ मैं ~अक्षत ने लगभग झेंपते हुए बोला

नहीं इतना नहीं सोचते हम और अगर तुम कॉलेज वालों की बात को लेकर कह रहे तो , दुनिया है कहती रहेगी ,बस अगर हम खुद के लिए सही हैं तो फिर किसी को प्रूफ देने की जरूरत नही है ~सलोनी

अबतक कुछ ज्यादे ही इंटेंस वाली बातें हो चुकी थी उनके बीच , अब बस ख़ामोश हो दोनों कभी एक दूसरे से नज़रें मिलाते तो कभी ऑटो से बाहर देखते , कहने को बहोत सारी बातें थी उनके बीच पर समझ नहीं आ रहा था क्या बातें करें और किसके लिए ।

अक्सर यही होता है न जब कोई करीब आने लगता है तो उससे ज्यादे कुछ कहना हमें मुनासिब नहीं लगता ,या यूँ कहें निगाहें हमारे दरमियां अब ज्यादा कुछ कह रही होती हैं ।

क्या हुआ क्या देख रहो इतने ध्यान से ~सलोनी

बस ये तुम्हारे जो बेतरतीब बाल हैं …अच्छे लग रहे है ऐसे ही रहने दो ~अक्षत

#yqbaba#yqdidi#yqbhaijaan#yqtale# Saloni~यादें #

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