Saloni ~ यादें ..।


तुम काफी फिलोसोफिकल हो ~ सलोनी

पता नहीं , पर पराग भी यही कहता है ~ अक्षत

हां भैया , आगे वाले कट से लेफ्ट ले लेना ~ सलोनी ने ऑटो वाले को हिदायत देते हुए बोला

मैडम जी सीधे सही रहेगा आगे से रास्ता बंद है ~ ऑटो वाले भैया

चलिए अच्छा सीधे ही , दूरी तो उतनी ही पड़ेगी ~ अक्षत

आपको कैसे पता रास्ता बंद है ~ सलोनी

मैडम कल शाम में एक सवारी लेकर यहीं आया था ~ ऑटो वाले भैया

चलिए सही है और हां , गली में ज्यादा आगे नहीं जाना एंट्री के पास ही रोक लीजिएगा ~ सलोनी

क्यों , वहां से तुम्हारा होस्टल तो काफी दूर है ~ अक्षत

हां पर , वो कर्नल अंकल न हो न और तुम भी तो हो ~ सलोनी

हम्ममम्म हां ये तो है , सही है वैसे मैं तो इन्हें अपने रूम तक ले जाऊंगा ~ अक्षत

ये तो बोल रहे रास्ता बंद है उधर का, और तुम तो मुझे छोड़ने आये हो न ..?~ सलोनी

अरे तो इन्हें उधर कहाँ भेज रहे , वही रूम से आगे लेफ्ट लेकर जिम वाले रास्ते चले आएंगे, और वहां से तुम्हारा होस्टल तो पास में है यहाँ तक तो छोड़ ही रह न ~ अक्षत ने एक सांस में रास्तों के ज़िक्र तो ऐसे किया मानो , दुबारा बोलने में उसे तक़लीफ़ होती ।

सही है तुम्हारा , वैसे जो receive करने आता है न वो घर तक छोड़ता है ~ सलोनी

सही फरमाया , अगर घर होता तो जरूर छोड़ता सलोनी ,पर ये तो तुम्हारा हॉस्टल और कर्नल अंकल है ~ अक्षत

सही है ….~ सलोनी

क्या , सही है ~अक्षत

तुम और तुम्हारी फिलोसॉफी ~ सलोनी

अक्षत के लिए वो ऑटो का सफर आज किसी ट्रैन के 2nd टायर वाले यात्रा से भी ज्यादे सुहाना लग रहा था , जिसमें सिर्फ आप होते है और आपके सामने वो नज़ारे जिन्हें आप अपनी यादों में समेटना चाहते हैं , फर्क सिर्फ इतना था कि आज अक्षत के साथ उन नज़ारों की जगह सलोनी थी ।

हां भैया बस बस , यहीं रोक लो ,चेंज है तुम्हारे पास ~ सलोनी

नही 200 हंड्रेड हैं सिर्फ ,अरे यहां से तो दूर पड़ेगा न , रूको मैं भी चलता हूँ ~ अक्षत ने पहली बार खुद को कोसते हुए बोला
(काश वो रूम से निकलते वक्त कुछ और पैसे रख लेता )

नहीं मैं चली जाऊंगी , वैसे भी कर्नल अंकल भी होँगे ही ~ सलोनी

तुम बता रही हो कि डरा रही हो ~ अक्षत

जो तुम समझ लो Btw thanks की तुम आये , अच्छा लगा ~ सलोनी

काहे बात का थैंक्स , ऑटो का फेयर तुम दे रही , तुमको होस्टल तक ड्राप भी नही कर रहा ,और ऊपर से थैंक्स भी बोल रही

अरे कोई न , फिर कभी ~ सलोनी

हम्म्म्म….. ठीक है ~अक्षत

भैया चले हम ~ ऑटो वाले भैया ने पूछा

कोई जल्दी है क्या भैया , थोड़ी देर रुक जाओ , या सुनो आगे वाले गेट के पास साइड में लगा लो ~
अक्षत ने ऑटो वाले को हिदायत दी कि वो सलोनी के कालोनी गेट पे थोड़ी देर रुक कर चले , ताकि वो सलोनी को जाता हुआ तसल्ली से देख सके ।

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