Saloni ~ यादें 


नींद पूरी हो गयी या अभी और सोना है ~ अक्षत

नहीं अभी अभी उठी हूँ , ट्रेन में ट्रेवेल करना हैक्टिक हो जाता है ~सलोनी

हां स्पेशली जब ट्रेन लेट हो तो और भी ~ अक्षत ने उसकी हां में हां मिलाते हुए बोला

सो क्या हो रहा है , तुम क्या कर रहे थे ~ सलोनी

तुम्हारे जगने का इंतज़ार …~ अक्षत

इतनी बोरिंग लाइन कहाँ कहाँ से खोज के लाते हो ~ सलोनी

बस आपका आशीर्वाद है , खोजने की जरूरत कहाँ पड़ती है ~ अक्षत

हाहाहाहा….. अच्छा है , मैं इतनी भी बोरिंग नहीं ~ सलोनी

अच्छा सुनो कहीं चाय पीने चले , तुम्हारा मूड भी थोड़ा फ्रेश हो जाएगा ~ अक्षत ने बड़े उम्मीद से पूछा

अभी…हम्म्म्म पर कहाँ , मैं सत्या नहीं जाने वाली ~ सलोनी ने शर्तिया अंदाज में हामी भरते हुए बोला

इतनी तकलीफ़ करने की कोई जरूरत नहीं आपको , पाम कोर्ट बगल में ही है या एक दादा की दुकान है मंदिर के बगल में , दोनों जगह है जहां आप चलना चाहे ~ अक्षत

दादा की दुकान कैसी है , बैठने वैठने की जगह तो है ना ~ सलोनी

हां , कॉफी शांति भी रहती है वैसे भी आज तो संडे भी है ~ अक्षत

यही कोई शाम के 5 बजने को थे , नवंबर वाले महीने की शाम ,हां वही जिसे लोग गुलाबी ठण्ड वाली शाम कहते हैं । नहीं खास तो ऐसा कुछ नही होता , पर अक्सर जब दो अजनबी उस शाम में अपनी दोस्ती तलाशने निकलते है तो वो गुलाबी हो ही जाती है ।

कहाँ हो मैं रूम से निकल रही हूं , वहीं मंदिर के पास मिलो ~ सलोनी

हां ठीक है आओ , मैं भी निकल ही दिया ~ अक्षत

10 मिनट बाद

कहाँ है ये लड़का बुला खुद गायब ~ सलोनी ने आते ही ताक झांक लगाई पर अक्षत न दिखा तो , मन ही मन बुदबुदाई

ओह्ह ….मंदिर भी जाते हो तुम ~ अक्षत को मंदिर से बाहर निकलता देख पूछा

हां , सोच जब तक तुम्हारा वेट करूँगा दर्शन कर ही लूं वैसे भी सुबह से आज नही आया था ~ अक्षत

तुम रोज़ मंदिर आते हो ~ सलोनी

नहीं , पर कोशिश करता हूँ , यहाँ थोड़ी शांति
शांति रहती है ~ अक्षत

सही है , मैं तो कभी कभी हो लेती हूं ,वैसे एक बात पूछुं ~ सलोनी

हाँ बिल्कुल ~ अक्षत

ऐसा क्या हो गया है कि तुम हर जगह शांति को ही खोजते हो ~ सलोनी

हाहाहाहा …..Nyc one , नहीं ऐसा नही है बस बचपन से एक आदत हो गयी मंदिर की और बाद में अच्छा भी लगने लगा ~ अक्षत ने थोड़ा गंभीर होते हुए बोला

अच्छी आदतें हैं तुम्हारी , सो कितनी दूर है दादा की चाय की दुकान ~ सलोनी

हां आगे से लेफ्ट टर्न पे है ,क्यों बोर हो रही क्या तुम ~ अक्षत ने दूर देखेते हुए पूछा

नहीं , actually I’m feeling well right now ~ सलोनी

वैसे जानती हो , ऐसे शाम वाले मौसम को क्या कहते हैं ~ अक्षत

नहीं तुम बताओ , मुझे नहीं पता ~ सलोनी

गुलाबी ठंड वाला मौसम कहते हैं ~ अक्षत

तुम जब भी रोमांटिक बातें करते हो न तो बड़े क्यूट लगते हो ~ सलोनी ने अक्षत की नज़रों में देखते हुए बोला

….पता नही ~ अक्षत ने लगभग नज़रें चुराते हुए बोला

दादा दो चाय कर दो …लड़का कॉफी ब्लश कर रहा है ~ सलोनी

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