माँ , जलेबी और फरुखाबादी 

Disclaimer ~ कहानी का ये सिर्फ पहला हिस्सा है !

पता नही आप सब की लाइफ में वो बरगद का पेड़ है या नहीं , पर अक्षत की लाइफ में एक बरगद का जरूर था , जिसकी दरख्तों में बैठकर वो अपने ज़िन्दगी के उन लम्हों को संजोता था जिसे को कभी जी नहीं सका था
कहानियों की यही खूबसूरती होती है कि जिन लम्हों को आप भूल जाते है या जी नहीं सकते , उन्हें यहां अपने मनमुताबिक ढाल कर जी सकतें है ।
अक्षत की ज़िंदगी मे पराग ऐसे ही बरगद के दरख़्त जैसा था जिसके पास बैठकर वो उसकी कहानियों में बस खो जाना चाहता था ।

अरे तुम कब आये ~ पराग ने आते ही सवाल किया , इससे पहले की अक्षत अपनी खयालों की दुनिया से बाहर आये ।

हां….., बस अभी ही तुमने कहा था न कि मेट्रो से 20 मिनट लगेंगे सो ~ अक्षत

नही रश रहता है सो टाइम लगता है ना , सो मैंने बोला , ज्यादे वेट तो नही करना पड़ा ~ पराग

नही अभी जस्ट आया 5 मिनट पहले , तुम बताओ आफिस से कब आये ~ अक्षत

मैं तो हार्डली 6 बजे तक आ जाता हूँ , और कुछ खाओगे , तो लेते चले भूख लगी है ~ पराग ने आदतन पूछा

नही , कुक आएगा न तो फिर , वैसे तुम्हे कुछ लेना हो ले लो ~ अक्षत , पता नहीं समय की मार थी या बेरोजगारी जो अक्षत को इतना डिसिप्लिन बना दिया था

कोई न कुछ ले लेते हैं और बताओ कैसा जा रहा सब ~ पराग

आल वेल , सब बढ़िया है तुम सुनाओ कैसे हो और फ्लैट कैसा है शिफ्ट अच्छे से हो गए थे ~अक्षत

हां थोड़ा हैक्टिक था , पर भाई क्या लोकेशन है मस्त व्यू मिलता है वहां से कुतुब मीनार का ~ पराग बताते काफी एक्ससिटेड हो गया था

सही है , वैसे भी तुम्हे हवेली पसंद है तो ढूढ ही लिया फाइनली ~ अक्षत ने तंजिया अंदाज में कहा

कहां भाई उमराव जान कहाँ है ~ पराग

पराग उमराव जान का ज़िक्र करते हुए मुस्कुराया , और जवाब में अक्षत भी मुस्कुरा दिया , ये मुस्कुराहट यूँ ही नही पनपी थी बल्कि उनकी दोस्ती में एक अहम क़िरदार थी उमराव जान ।
अबतक जो अक्षत मुस्कुराए पड़ा था अचानक उसकी आँखों से आसूं निकल रहे थे ।

अरे क्या हुआ , आँख में कुछ गया क्या, या उमराव जान की याद में रोने लगे ~पराग

पहले आंख में जो गया है उसे निकालो ~ अक्षत ने गंभीर आवाज़ मे बोला

रुक जाओ , निकले देता हूँ ~ पराग

शुक्रिया , वैसे क्या करे तुम्हारी उमराव जान हैं ही ऐसे की उनकी याद में आंसू बहाने को मन करता है ~ अक्षत

सच मे इतना पसंद करते थे …..~ इस दफ़े पराग की नजरें सवाली थी , क्योंकि वो समझ रहा था कि अक्षत किस उमरावजान की बात कर रहा ।

अगर हां कहें तो यक़ीन करोगे ~ अक्षत ने कातर निगाहों से सवाल किया

पता नही दोस्त….. रूम आ गया हमारा ~पराग ।

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