अनोखे ~ रिश्ते …! 

ज़िंदगी मे जो फांसले या नज़दीकियां हम खुद चलकर तय करते हैं , उस से जुड़ी हर वो याद
हमारे साथ ही चलती है , और हम लाख कोशिश भी कर लें न तो भी हम उनको यूँ बेवजह नहीं भूलते ।

You are cordially invited for ‘Sahitya Aaj tak ‘ ~ मेल बॉक्स में जैसे ही मेल फ़्लैश हुआ , अक्षत का आधा संशय खत्म हो चला था , जो अबतक सत्यजीत रे की ‘ पाथेर पांचाल ‘ की NCRT में छपी कहानी पढ़ रहा था ।

नहीं ये कोई स्पेशल मेल नहीं था ,बल्कि INDIA ToDAY की एक छोटी सी मैगज़ीन द्वारा आयोजित एक OPEN MIC में पर्फोमेंस के लिए कॉन्फॉमशन मेल था । जिसके लिए उसने रजिस्टर कर रखा था ।

उसी साहित्य आजतक में कहानी प्रतियोगिता के लिए भी उसने सोच रखा था , पर समझ नही पा रहा था कि कौन सी कहानी लिखे , सहसा उसने अपने कहानी ‘अनोखे ~ रिश्ते ‘ के कुछ हिस्सों को लिखने का फैसला किया ,और फिर अगले एक धण्टे बाद वो उस साहित्य मेले में था , जिसे अंग्रेजी में लिटरेचर फेस्ट कहते हैं ।

लगभग हर तरह के लोगों का जखीरा था , बडे बडे साहित्यकार से लेकर उन तमाम नवयुवकों का जो ख़ुद को अगली पीढ़ी से एसोसिएट करते थे । अक्षत उनमें न जाने कहाँ खड़ा था , वो तो बस वहाँ आये लोगो के एक्सपेरिएंस सुनने आया था , क्योंकि इसके अलावा कोई चारा भी न था , थोड़ी देर पहले हुई बातचीत से उसे पता चल चुका था कि आयोजक महोदय ने उसकी कविता को शॉर्टलिस्ट नही किया है सो वो थोड़ा डिस्पोइंटेड हुआ जैसा कि हर रचनाकार का होना लाज़मी है पर थोड़ी देर ठहर कर वहाँ आये लोगो की कविता सुनने के बाद उसे लगा कि ‘ हर दफ़े सिर्फ अपनी कह भर लेना ज़रूरी नही होता , कई बार दूसरों को खामोशी से सुन भर लेना ही काफी होता है । ‘

अब तक काफी समय हो चला था , उसे दर बदर कहानियों की किताबों ,उनके स्टॉल और कुछ अनगढ़ साहित्यप्रेमी को सुनते समझते हुए , अनगढ़ इसलिए कि उनके उनमे कोई अलंकार या रस का माधुर्य नहीं बल्कि उनमे उनके व्यक्तिगत अनुभव का बेढबपना था जिसे वो ख़ूब पसंद करता था ।

Excuse me कहानी प्रतियोगिता के लिए पार्टिसिपेट करना था ~ अक्षत ने उस पोस्टर तले बैठी मोहतरमा से पूछा

हां यही जगह है आप फॉर्म भर दें , फिर कहानी लिखे , साथ में मेल ईडी और फ़ोन नंबर भी जरूर लिखियेगा ~ मोहतरमा ने लगभग हल्की मुस्कान बिखेरते हुए बोला ।

शायद ये मुस्कान उसके मासूम सवाल के लिए थी ,जो उसने पूछा था । क्योंकि मोहतरमा के पीछे लगे पोस्टर में साफ लिखा था कि – कहानी प्रतियोगिता के लिए  आप सादर आमंत्रित है ।

पर ये उनकी गलती नहीं थी , ऎसे सवाल हम अक्सर आदतन ही पूछते हैं मासूमियत से नही । खैर

मोहतरमा ने एक नोट बुक थमाई जिसपे कहानी लिखनी थी और पेन और कुछ हिदायत देते हुए कहानी शाम के 5 बजे के पहले लिख कर submit करने को बोला ।

अक्षत जो मोहतरमा से ज्यादे कहानी लिखने की जगह में तल्लीन था , उसने मोहतरमा को उनकी वाली मुस्कान के साथ थैंक्स बोल जगह ढूंढने में लग गया जहां वो एक सुकूँ के साथ कहानी लिख सके ।

थोड़ी देर के खोज बीन के बाद उसे कोने में उस आयोजन स्थल का सबसे सुनसान कोना दिखा जहां वो अपनी कहानी तसल्ली के साथ लिख सकता था ।

अब इंतज़ार था उसे उस प्लाट का जहां से वो अपनी कहानी की शुरुआत कर सके ठीक वैसे ही जैसे उस वाकिये का हुआ था जिसके बारे में वो लिखने वाला था ।

#Yqbaba#yqdidi#yqtale# अनोखे रिश्ते #

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