लेखक: M Raman'$

चलो इक वादा करतें हैं , सफ़र में साथ चलने का ..! 

यूं  बदस्तूर कहीं तू मेरा हमदम न बन जाये । की मत कर इतने क़रीब हमें कहीं ये ज़माना तेरा दुश्मन न बन जाए । बहुत नाज़ुक से रिश्ते हैं तेरे और मेरे क़िस्से में वफ़ा की राह पे चलना सबकी आस पर टिकना , कभी मुमकिन नहीं था तू जो अब मेरे हिस्से में … पढ़ना जारी रखें चलो इक वादा करतें हैं , सफ़र में साथ चलने का ..! 

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मम्मी , किचन और हम 

#yqbaba#yqdidi#yqtale#मम्मी और हम # और आपकी बातें Disclaimer ~ ये माँ बेटे का रिश्ता है ,इसे तर्क के तराजू पे मत तौलियेगा । बचपन मे जब कभी भी मैं बहाने बनाकर स्कूल जाने के बजाय घर रुककर आपके साथ किचन के काम शेयर करवाता , ताकि आपका गुस्सा ज्यादे देर न रहे और आप पापा … पढ़ना जारी रखें मम्मी , किचन और हम 

बचपन की बयार 

वो अड़हुल का पेड़ , वो कनैल की डाल याद आती रही वो बचपन की बयार , कभी मिट्टी वाली गाड़ी तो कभी पलास की झाड़ , गढ़ते थे जिनमें हम अपने सपनो की वो आस । कभी मिट्टी के घरौंदे , तो कभी ईंटे का वो मकान , बुनते थे जिनसे हम अपने कल … पढ़ना जारी रखें बचपन की बयार 

कविता…! जब तुम बन जाती हो 

उस रोज नया पल होता था , हम जगते थे तब जब सब सोता था सिरहाने से पड़ी अपनी वो पीली चादर हटाकर , बगल में रख देते थे , जब चुपचाप से घड़ी में कुछ देखते होते थे । अचानक सहम कर बैठ जाते , वक़्त की आवाज़ से कुछ इस कदर डरे होते … पढ़ना जारी रखें कविता…! जब तुम बन जाती हो 

शास्त्रीय संगीत एवं लोक संगीत का अनोखा मेल ( चइता / चैती / घाटो )

( चइता ) रे अवध में बजेला बधाइयां हो रामा , अवध नगरिया । राम , लछमण ,भरत , शत्रुघन जनम लिए चारों भइया हो रामा , अवध नगरिया ।। रामनवमीं के इस पावन अवसर पर ,हम आपको लिए चलते हैं , उस लोक संगीत ( चइता / चैती / घाटो ) की तरफ जहाँ … पढ़ना जारी रखें शास्त्रीय संगीत एवं लोक संगीत का अनोखा मेल ( चइता / चैती / घाटो )

इंक़लाब ज़िंदाबाद

' इंक़लाब - ज़िंदाबाद ' ' ज़िन्दा रहने के मौसम बहुत हैं मगर जान देने की ऋतु रोज़ आती नहीं , हुस्न और इश्क़ दोनों को रुसवा करे ,वोजवानी जो खूं से नहाती नहीं । ' ( फैज़ अहमद फैज़ ) ' इंक़लाब-ज़िंदाबाद ' हसरत मोहानी के दिये ये शब्द आज भी जब हम कहीं … पढ़ना जारी रखें इंक़लाब ज़िंदाबाद