रहबर — अख्तर की कलम

“जहां में गरीब का रहबर नहीं होता, जो गालिब हैं उनका घर नहीं होता, लोग,गाड़ी,सड़कें,मकान, होते यहाँ, हम नहीं होते तो ये शहर नहीं होता, शाह, शेख, औलिया, भगवान हुए सभी, न जाने क्यों कोई भी बशर नहीं होता, यूँ तो जिन्दगी बहुत आसाँ रही मगर, तन्हा होते मुश्किल सफर नहीं होता, हर वक्त समझौता […] … पढ़ना जारी रखें रहबर — अख्तर की कलम

बचपन वाली जाह्नवि…!

जानते हैं हम की तुम बड़ी हो रही हो , बचपन की यादें साथ लिए खड़ी हो रही हो । वो गलतियां , वो मासूमियत ,और सिसकियां सब कुछ है अभी तुम्हारे हिस्से में , बस सहेज़ कर रखना तुम इसे अपने आने वाले ज़िन्दगी के क़िस्से में । अब चाहे पापा की सुपर हीरो … पढ़ना जारी रखें बचपन वाली जाह्नवि…!

Saloni ~ यादें 

तो कहो कुछ तुम तो बिल्कुल शांत ही हो गए ~ थोड़ी देर की खामोशी के बाद सलोनी ने खुद ही बातों का सिलसिला आगे बढ़ाते हुए पूछा नहीं ...मैं actually चाय पे कॉन्सनट्रेट कर रहा हूँ , ठंडी हो गयी तो अच्छा नही लगेगा ~ अक्षत नहीं चाय तो दुबारा गर्म हो जाएगी , … पढ़ना जारी रखें Saloni ~ यादें 

Saloni ~ यादें 

नींद पूरी हो गयी या अभी और सोना है ~ अक्षत नहीं अभी अभी उठी हूँ , ट्रेन में ट्रेवेल करना हैक्टिक हो जाता है ~सलोनी हां स्पेशली जब ट्रेन लेट हो तो और भी ~ अक्षत ने उसकी हां में हां मिलाते हुए बोला सो क्या हो रहा है , तुम क्या कर रहे … पढ़ना जारी रखें Saloni ~ यादें 

पराग ….!

जो तुम आते हो हर बार हमेशा कुछ रह जाता है , जानें क्यूँ अन्दर ही अन्दर सब खल जाता है । उम्मीद भी बहुत होती है तुमसे .... और बातें भी , पर न जाने क्यूँ , तुमसे मिलते ही सब ठहर जाता है । माँ की यादें , बापू के क़िस्से या फिर … पढ़ना जारी रखें पराग ….!

Saloni ~ यादें ..।

तुम काफी फिलोसोफिकल हो ~ सलोनी पता नहीं , पर पराग भी यही कहता है ~ अक्षत हां भैया , आगे वाले कट से लेफ्ट ले लेना ~ सलोनी ने ऑटो वाले को हिदायत देते हुए बोला मैडम जी सीधे सही रहेगा आगे से रास्ता बंद है ~ ऑटो वाले भैया चलिए अच्छा सीधे ही … पढ़ना जारी रखें Saloni ~ यादें ..।