Saloni ~ यादें 

ज़िन्दगी में हमेशा फ़िकर कभी भी हार या जीत की नहीं रहती , बल्कि डर हमेशा उस हार या जीत के बाद पसरे सन्नाटे से लगता है जहां हमारी कश्मकश लगभग खत्म हो चुकी होती है । पिछले दो धण्टे के लंबे इंतजार के बाद उन्हें उस कॉलेज फेस्ट वाली शाम में एक दूसरे से … पढ़ना जारी रखें Saloni ~ यादें 

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अनोखे ~ रिश्ते 

उस रोज़ दोपहर अब ढलने लगी थी धीरे-धीरे ठीक वैसे ही जैसे शाम अपनी मुंडेर पर चढ़ने को आतुर दिख रहा था । यही कोई दिन को 3 बजने को थे , अक्षत अबतक अपनी जगह कि तलाश में उस सुनसान कोने से लेकर उस ओपन हाउस वाले लॉन की तरह दिखने वाले कैफ़े के … पढ़ना जारी रखें अनोखे ~ रिश्ते 

अनोखे ~ रिश्ते …! 

ज़िंदगी मे जो फांसले या नज़दीकियां हम खुद चलकर तय करते हैं , उस से जुड़ी हर वो याद हमारे साथ ही चलती है , और हम लाख कोशिश भी कर लें न तो भी हम उनको यूँ बेवजह नहीं भूलते । You are cordially invited for 'Sahitya Aaj tak ' ~ मेल बॉक्स में … पढ़ना जारी रखें अनोखे ~ रिश्ते …! 

शहर ….कुछ आपका , कुछ हमारा !

सब एक पल को ख़ामोश , किसी को माई के ऐसे कटु वचन का भान न रहा , तभी मिशिर गुरु ने खामोशी तोड़ते हुए पल्लगी ( नमस्कार) की । नहीं माई अइसन काहे कहत हो , औरत तो दुर्गा का रुप होत है ~ मिशिर गुरु ने माई के उम्र का लिहाज़ करते हुए … पढ़ना जारी रखें शहर ….कुछ आपका , कुछ हमारा !

इक याद साझा किए देता हूँ ..!

यूँ तो आपसे जुड़ी बातों का हर लम्हा , ज़ेहन में कैद हो चुका है पर पिछली दफ़े जब लगभग 9 साल बाद आप दोबारा हमे छोड़ने को मिर्ज़ापुर रेलवे स्टेशन पे आये तो , एक बार फिर से यादों का जखीरा सामने आ खड़ा हुआ । और ये फोटो उसी वक़्त चुपके से ली … पढ़ना जारी रखें इक याद साझा किए देता हूँ ..!

माँ , जलेबी और फरुखाबादी 

पार्ट ~2 अबतक पराग के फ्लैट पे आये अक्षत को एक घंटे हो गए थे , और तब तक वो उसके फ्लैट के interior को समझ रहा था , यही कोई शाम के 7 बजने को थे , ठीक ढलती शाम के बाद वाला वक़्त जो दिन के गुज़र जाने की मुकम्म्मल गवाही देता है … पढ़ना जारी रखें माँ , जलेबी और फरुखाबादी 

माँ , जलेबी और फरुखाबादी 

Disclaimer ~ कहानी का ये सिर्फ पहला हिस्सा है ! पता नही आप सब की लाइफ में वो बरगद का पेड़ है या नहीं , पर अक्षत की लाइफ में एक बरगद का जरूर था , जिसकी दरख्तों में बैठकर वो अपने ज़िन्दगी के उन लम्हों को संजोता था जिसे को कभी जी नहीं सका … पढ़ना जारी रखें माँ , जलेबी और फरुखाबादी