कविता…! जब तुम बन जाती हो 

उस रोज नया पल होता था , हम जगते थे तब जब सब सोता था सिरहाने से पड़ी अपनी वो पीली चादर हटाकर , बगल में रख देते थे , जब चुपचाप से घड़ी में कुछ देखते होते थे । अचानक सहम कर बैठ जाते , वक़्त की आवाज़ से कुछ इस कदर डरे होते … पढ़ना जारी रखें कविता…! जब तुम बन जाती हो 

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शास्त्रीय संगीत एवं लोक संगीत का अनोखा मेल ( चइता / चैती / घाटो )

( चइता ) रे अवध में बजेला बधाइयां हो रामा , अवध नगरिया । राम , लछमण ,भरत , शत्रुघन जनम लिए चारों भइया हो रामा , अवध नगरिया ।। रामनवमीं के इस पावन अवसर पर ,हम आपको लिए चलते हैं , उस लोक संगीत ( चइता / चैती / घाटो ) की तरफ जहाँ … पढ़ना जारी रखें शास्त्रीय संगीत एवं लोक संगीत का अनोखा मेल ( चइता / चैती / घाटो )

इंक़लाब ज़िंदाबाद

' इंक़लाब - ज़िंदाबाद ' ' ज़िन्दा रहने के मौसम बहुत हैं मगर जान देने की ऋतु रोज़ आती नहीं , हुस्न और इश्क़ दोनों को रुसवा करे ,वोजवानी जो खूं से नहाती नहीं । ' ( फैज़ अहमद फैज़ ) ' इंक़लाब-ज़िंदाबाद ' हसरत मोहानी के दिये ये शब्द आज भी जब हम कहीं … पढ़ना जारी रखें इंक़लाब ज़िंदाबाद

रहबर — अख्तर की कलम

“जहां में गरीब का रहबर नहीं होता, जो गालिब हैं उनका घर नहीं होता, लोग,गाड़ी,सड़कें,मकान, होते यहाँ, हम नहीं होते तो ये शहर नहीं होता, शाह, शेख, औलिया, भगवान हुए सभी, न जाने क्यों कोई भी बशर नहीं होता, यूँ तो जिन्दगी बहुत आसाँ रही मगर, तन्हा होते मुश्किल सफर नहीं होता, हर वक्त समझौता […] … पढ़ना जारी रखें रहबर — अख्तर की कलम

बचपन वाली जाह्नवि…!

जानते हैं हम की तुम बड़ी हो रही हो , बचपन की यादें साथ लिए खड़ी हो रही हो । वो गलतियां , वो मासूमियत ,और सिसकियां सब कुछ है अभी तुम्हारे हिस्से में , बस सहेज़ कर रखना तुम इसे अपने आने वाले ज़िन्दगी के क़िस्से में । अब चाहे पापा की सुपर हीरो … पढ़ना जारी रखें बचपन वाली जाह्नवि…!

Saloni ~ यादें 

तो कहो कुछ तुम तो बिल्कुल शांत ही हो गए ~ थोड़ी देर की खामोशी के बाद सलोनी ने खुद ही बातों का सिलसिला आगे बढ़ाते हुए पूछा नहीं ...मैं actually चाय पे कॉन्सनट्रेट कर रहा हूँ , ठंडी हो गयी तो अच्छा नही लगेगा ~ अक्षत नहीं चाय तो दुबारा गर्म हो जाएगी , … पढ़ना जारी रखें Saloni ~ यादें